Real Life Money Book Summary In Hindi

इस बुक में हम जानेगे की किस तरह से आप अपने फाइनेंस यानी कि पैसों को कंट्रोल कर सकते है |


Real Life Money About Book


Real Life दो लफ्जों में

2020 में आई ये बुक एक फाइनेंशियल गाइड की तरह वर्क करती है । इस बुक में लेखिका अपनी फाइनेंशियल प्रॉब्लम के बारे में डिस्कस करते हुए ये भी बताती हैं कि किस तरह से हम अपने फाइनेंस को सही तरह से मैनेज कर सकते हैं । लेखिका हमारे और हमारे पैसों के बीच के कॉम्प्लेक्स रिलेशनशिप को पॉइंट आउट करके उससे निकलने का रास्ता भी शेयर करती हैं ।

यह बुक किसके लिए है ?

  • यह बुक उन लोगों के लिए है जो अपने उधार की लाइफ से परेशान हैं ।
  • यह बुक उन लोगों के लिए भी है जिनकी लाइफ की फाइनेंशियल कंडीशन बैलेंस नहीं है ।
  • यह बुक उनके लिए भी है जो किराए के घर से परेशान हो चुके हैं और अपने खुद के घर का सपना देखते हैं ।

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लेखिका के बारे में

Clare Seal एक पॉपुलर इंस्टाग्राम एकाउंट @myfrugalyear रन करती हैं । उनके आर्टिकल जोकि फाइनेंस से रिलेटेड होते हैं वो कई पॉपुलर जगह अपीयर हो चुके हैं जैसे की द टेलीग्राफ , ग्रज़िया , हेलो मैगजीन ।


अगर आप अपने फाइनेंस को लेकर स्ट्रगल कर रहे हैं तो हो सकता है कि आपके हालात आपके कंट्रोल में नहीं हैं ।


बहुत से लोग उधारी में जी रहे हैं । वो लोग अपना रेंट पे कर पाने में असफल हैं और एक इनसिक्योर जॉब का पार्ट हैं । हालांकि वो लोग लगभग 30 साल के हो हैं लेकिन अभी भी किराए के घर में रह रहे हैं और अपना खुद का घर लेने का सपना देखते हैं ।

2008 की इकोनॉमिक क्राइसिस के बाद इस जनरेशन के लिए चीजें और ज्यादा मुश्किल हो गईं हैं । कई लोगों के लिए फाइनेंशियल सिक्योरिटी को खत्म करना एक सपना बनकर रह गया है ।

अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है । आप इस बुक को पढ़के जान पाएंगे की किस तरह लेखिका ने भी खुद इन प्रॉबलम्स को फेस किया है और किस प्रकार उन्होंने खुद को इस सब से बाहर निकाला है ।

इए समरी को पढ़के आपको समझ आएगा कि किस तरह अपने पैसों की प्रॉब्लम के साथ डील कर सकते हैं । इसके अलावा आप जानेंगे कि किस तरह इंस्टाग्राम हमारी फाइनेंशियल प्रॉब्लम को बढ़ा सकता है ? क्यों किराए के घर में भी आपको अपने घर जैसा अनुभव करना चाहिए , और इकोनॉमिकल लाइफ के साथ किस तरह से आप अपने दोस्तों और परिवार के और करीब जा सकते हैं ।

तो चलिए शुरू करते हैं !

कुछ लोग होते हैं जो हिचकिचाहट की वजह से एटीएम पर अपना बैंक बैलेंस भी नहीं चेक कर पाते हैं । ज्यादातर ऐसे लोग वो होते हैं जिनके पास पैसे तो होते हैं लेकिन वो खर्च भी बहुत जल्दी हो जाते हैं जिसकी वजह से बैंक बैलेंस 0 रह जाता है ।

ऐसे लोगों को बार बार बैंक से वार्निंग वाले लेटर आते हैं । और ऐसे सिर्फ चुनिंदा लोग नहीं है , बहुत से लोग हैं जिनके हालात ऐसे हैं । तो अगर आपका फाइनेंस भी एक मेस बन चुका है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है । कई बार ऐसा होता है कि फाइनेंशियल नॉलेज न होने की वजह से लोगों को पैसे के मामले में काफी डिसएडवांटेज होता है ।

फाइनेंशियल नॉलेज न होने के पीछे फाइनेंशियल एजुकेशन न मिल पाना एक बहुत बड़ी वजह है । बात करें यूनाइटेड किंगडम की तो वहां पर स्कूल में फाइनेंशियल एजुकेशन का कोई रोल ही नहीं है ।

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तो जब कोई स्टूडेंट पढ़ाई या फिर जॉब के लिए घर से बाहर निकलता है तो उसको सेविंग्स और फाइनेंस से जुड़ी हुई चीजों की बिल्कुल नॉलेज नहीं होती । बात करें लेखिका की तो उनके स्कूल में भी फाइनेंस के बारे में सिर्फ एक बार बात हई थी वो भी किसी और सब्जेक्ट को लेकर ।

स्टूडेंट्स को फाइनेंशियल एजुकेशन देना पैरेंट्स के ऊपर छोड़ दिया जाता है । और इसको एक लॉटरी की तरह देखा जा सकता है क्योंकि सारे स्टूडेंट्स एक अमीर घर मे पैदा नहीं होते हैं तो इस वजह से उनके पैरेंट्स उनको सही फाइनेंशियल एजुकेशन दे सकते हैं कि किस प्रकार से पैसों का सही यूज़ होता है ।

कई बार तो लोग अच्छी फाइनेंशियल कंडीशन की वजह से भी परेशानी में आ जाते हैं । यूनाइटेड किंगडम में तो सिचुएशन काफी खराब है । वहाँ की गवर्मेंट ने उन प्रोटेक्शन को हटा दिया जोकि जॉब सेक्युटिरी और सैलरी बढ़ाने की गारंटी देते थे ।

फाइनेंशियल इनसिक्योरिटी किसी इंडिविजुअल के फेल होने से बड़ी प्रॉब्लम है । 2019 में यूनाइटेड किंगडम के एक परिवार की इनकम मात्र 15,400 पाउंड रह गयी थी । हालांकि वहां पर लोग हॉलिडे , क्लॉथ और शौकिया चीजों पर ज्यादा खर्च करते हैं लेकिन फिर भी फाइनेंशियल इनसिक्योरिटी वहां पर एक बड़ी प्रॉब्लम है । इसको ठीक करने के लिए बहुत सारे स्टेप लिए जा सकते हैं लेकिन ये समझना भी गलत है की आपकी फाइनेंशियल सिचुएशन आपकी गलतियों का नतीजा है ।


जब बात आती है पैसे की प्रॉब्लम की तो शर्म भी उसके साथ साथ चलती है ।


हम सभी के एकॉर्डिंग एक हैप्पी फैमिली वहीं है जिसमें पति पत्नी जॉब करते हों , उनके दो बच्चे हों और उनका एक अच्छा सा अपना घर हो ।

मान लीजिए कभी उस फैमिली में से एक इंसान ने ज्यादा खर्चा कर दिया और उस खर्चे के बारे में उसने घर में किसी को बताया भी नहीं । लेकिन कुछ समय बाद उस एक्स्ट्रा खर्चे की वजह से घर की फाइनेंशियल सिक्योरिटी डिस्टर्ब होने लगी । ये बहुत कॉमन सिचुएशन है ।

ऐसी सिचुएशन में वो इंसान साइलेंस को अपना साथी बना लेगा । और साइलेंस के साथ उसको शर्म का भी एहसास होने लगेगा । हर टाइम उसके दिमाग में पैसे की वजह से टेंशन बनी रहेगी ।

जब भी उसको बैंक की तरफ़ से कॉल आएगी वो उस कॉल को पिक करने में भी हिचकिचाएगा । जब आप खुद को शर्म की वजह से किसी ऐसी खराब सिचुएशन में डाल लेते हैं तो आप कोई एक्शन भी नहीं ले पाते हैं ।

बात करें लेखिका की तो 21 साल की उम्र में उनके पिता की डेथ हो गयी । पिता की तरफ़ से उनको सिक्योरिटी के तौर पर 10,000 पाउंड मिले । पैसे बचाने की जगह उन पैसों से लेखिका ने एक हॉलिडे एन्जॉय किया । लेकिन जब वो पैसे खत्म हुए तो उनको अंदर ही अंदर शर्म का एहसास हुआ कि जो पैसे उनको बचाने चाहिए थे उनको उन्होंने एक हॉलिडे के लिए खर्च कर दिया ।

तो जब भी आपको फाइनेंशियल प्रॉब्लम आए तो सबसे अच्छी चीज है की आप इसके लिए उत्तरदायी रहें । क्योंकि ऐसा करने के बाद ही आप ऐसी सिचुएशन को अच्छे से डील कर पाएंगे । अपनी गलतियों को मान लेने का मतलब ये नहीं है की आप हार गए बल्कि ऐसा करने से आप साइलेंस और शर्म से बाहर निकलकर उस सिचुएशन को ठीक करने के लिए कुछ एक्शन ले सकेंगे ।

अगर लेखिका ने अपने उस खराब फाइनेंशियल डिसीजन को एक्सेप्ट कर लिया होता तो शायद उनको इतना शर्मशार महसूस न हुआ होता । जब आप किसी चीज के बारे में गिल्टी होते हैं तो आपका मन होता है की सबसे दूर क्यों न चले जाएं ।

लेकिन अपनी मिस्टेक्स को एक्सेप्ट करने से शर्म कम हो जाती है ।

अगर आपको लगता है की सोशल मीडिया की वजह से पैसों की समस्या हो रही है तो फिर एक स्टेप पीछे लेकर अपने फाइनेंस को कंट्रोल करिए ।

जब आपकी फाइनेंशियल कंडीशन सही नहीं होती तो सोशल मीडिया पे समय इन्वेस्ट करना भी मुश्किल होता है । क्योंकि सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों की परफेक्ट लाइफ देखकर आपको और भी ज्यादा बुरा फील होगा । और इससे शायद आपकी फाइनेंशियल सिचुएशन और ज्यादा खराब हो जाए ।

जब लेखिका मैटरनिटी लीव पर थीं तब उन्होंने अपना काफी समय सोशल मीडिया पर इन्वेस्ट किया । वहां पर उन्होंने कई तरह के अलग अलग इंटीरियर डिज़ाइन वाले घर देखे और उन्हें देखने के बाद उनका मन भी हुआ की वो अपने घर को रेनोवेट करें ।

हालांकि वो पहले से ही खराब फाइनेंशियल कंडीशन में थीं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने घर को रेनोवेट करने पर पैसा खर्च किया । हालांकि रेनोवेट होने के बाद उनका घर बिल्कुल वैसे ही लगने लगा जैसे उनकी इच्छा थी लेकिन इसके लिए उनको बहुत सारे पैसे उधार लेने पड़े ।

ऐसा असल में क्यों हुआ ? ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सोशल मीडिया पर वो सब चीजें देखने के बाद लेखिका को लगा की उनका स्टैण्डर्ड काफी कम है और उसको ऊपर ले जाने के लिए उन्होंने ये सब किया ।

वैसे इस बिहैवियर को अवॉइड करने के बहुत सारे तरीके हैं । सबसे पहली चीज के कि कुछ रियल करें और दूसरे लोगों की लाइफ की इमेज से दूर रहें । कुछ ऐसा करने की कोशिश करें जिसमें इंटरनेट इन्वॉल्व न हो ।

और दूसरी बात जब आप अपनी लाइफ को किसी के साथ कम्पेयर करें तो अपने आप से सवाल करें की उसके जैसे लाइफ जीने के लिए क्या आप अपने पास मौजूद चीजों को सैक्रिफाइस करने को तैयार हैं । क्या आप अपने दोस्तों और परिवार को छोड़ देंगे । उम्मीद है की खुद से ये सवाल करने के बाद आपको अपना जाएगा ।

याद रखें की ऑनलाइन मौजूद ज्यादातर चीजें एक इल्यूजन है । इल्यूजन यानी की भ्रम । सोशल मीडिया पर दिखाई गयी परफेस्ट चीजें बहुत कम ही परफेक्ट होती हैं । याद रखिये हम वही देखते हैं जो लोग हमें दिखाना चाहते हैं ।


फाइनेंस एक फेमिनिस्ट इशू है ।


आपको एक शॉक कर देने वाला स्टेटिस्टिक्स बताते हैं । यूनाइटेड किंगडम में 64 % लोग जो फाइनेंशियल प्रॉब्लम से परेशान हैं वो महिलाएं हैं । हो सकता है ऐसा इसलिए हो क्योंकि महिलाओं को ज्यादा सैलरी वाली नौकरी नहीं मिलती या शायद इसलिए क्योंकि फैमिली के प्रति उनकी कमिटमेंट ज्यादा होती है ।

वजह जो भी हो ये बात तो साफ है की पैसे के मामले में जेंडर डेसपेरिटी है । बात करें जेंडर पे गैप की यानी की महिलाओं और पुरुषों को मिलने वाली सैलरी के गैप की तो बीते सालों में इसमें कोई खास इम्प्रूवमेंट नहीं हुआ है । ऐसा इसलिए क्योंकि इस फील्ड में ट्रांसपेरेंसी की कमी है ।

बहुत सारी वर्कप्लेस पर एम्पलॉय अपनी सैलरी के बारे में खुलकर डिसकस भी नहीं कर सकते । ऐसी सिचुएशन में ये पता कर पाना बहुत मुश्किल है की महिलाएं पुरुष से ज्यादा कमा रहीं या या कम । यूनाइटेड किंगडम में तो और भी ज्यादा प्रॉब्लम हैं ।

उनके यहां एक पिंक टैक्स होता है जिसकी वजह से किसी भी प्रोडक्ट के लिए महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा पे करना पड़ता है । महिलाओं की फाइनेंशियल कंडीशन पर तब और प्रेसर बढ़ता है जब वो मां बनती हैं । यूनाइटेड किंगडम में मैटरनिटी लीव पर पेमेंट इतनी लो है की बहुत सी महिलाएं गरीबी में चली जाती हैं ।

मां बनने के बाद कपड़े और खाने पर खर्च तो बढ़ता ही है साथ ही महिलाओं के कैरियर पर भी संदेह बढ़ जाता है । जब वो काम पर लौटती हैं तो पार्ट टाइम जॉब या फिर फ्लेक्सिबल टाइम की डिमांड करती हैं तो उनको न कर दिया जाता है ।

फिगर्स के एकॉर्डिंग हर साल 54,000 महिलाएं प्रेगनेंसी की वजह से अपनी जॉब खो देती हैं । कई कम्पनी तो ऐसी महिलाओं को जॉब ही नहीं देतीं जो प्रेगनेंसी के करीब होती हैं । 44 % महिलाओं का कहना है की प्रेगनेंसी के बाद उनकी सैलरी कम कर दी गयी है । अभी 2021 है और कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है ।

हमसे पहली वाली जनरेशन के लिए अपना घर ले पाना काफी आसान था , लेकिन आने वाले समय में ये एक इम्पॉसिबल काम बनकर रह जाएगा । अगर आप किराए के घर पर रहते हैं तो आपको पता होगा की अपना खुद का घर न होने पर कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है । किराए के घर मे आप अपने एकॉर्डिंग कुछ नहीं कर सकते ।

बात करें यूनाइटेड किंगडम की तो वहां पर उनकी टोटल पापुलेशन का 1/5 पार्ट किराए के घर में रहता है । और दिन प्रतिदिन ये नम्बर बढ़ता भी जा रहा है । अगर आप किसी अच्छे घर से नहीं हैं या फिर अगर आपने शुरू से ही अपने खुद के घर के लिए पैसे नहीं सेव किए हैं तो आपका अपना खुद का घर ले पाना लगभग इम्पॉसिबल है।

आखिर यूनाइटेड किंगडम में ये प्रॉब्लम आई क्यों ? मार्गरेट थैचर जब यूनाइटेड किंगडम की प्राइम मिनिस्टर बनीं तब उनका टारगेट यह था की सभी को उनका खुद का घर दिलाया जाए । और इसी कारण से उस समय यूनाइटेड किंगडम में किराए के घर में रहना और भी महंगा हो गया जिससे सब यही चाहने लगे की उनका भी अपना खुद का घर हो ।

और आज भी कंडीशन कुछ वैसी ही है । आज भी अपनी खुद की प्रॉपर्टी होना एक बहुत जरुरी चीज है । लेकिन खुद की प्रॉपर्टी खरीद कर उसपर घर बनाकर उनको किराए पर देने की वजह से किराए के घर में रहना और महंगा हो गया है । इसी वजह से जो लोग किराए पर रहते हैं वो कभी अपने खुद के घर के लिए पैसे सेव नहीं कर पाते क्योंकि उनका ज्यादतर पैसा घर का किराया देने में निकल जाता है ।

इसलिए आने वाली जनरेशन के लिए अपना घर ले पाना काफ़ी मुश्किल हो गया है । तो ये समय है अपने डिसीजन को री कंसीडर करने का क्योंकि आप अपना आधा जीवन तो किराए के घर मे ही बिता देते हैं ।

ग्रिल्लो ने अपनी बुक होम रेंटेड स्वीट होम में कहा है की कोशिश करें कि आप अपने किराए के घर को इस तरह बना लें की वहां पर आपको अपने घर जैसा एहसास हो । उस किराए के घर को अपनी सोच के एकॉर्डिंग डेवलप करें । हालांकि उनका मानना है की रेंटेड हाउस को लेकर गवर्मेंट की पालिसी में बदलाव आना चाहिए ।


फाइनेंशियल डिफिकल्टी से निकलने के लिए जरूरी है की आप अपने लिए कंक्रीट यानी की पक्के गोल सेट करें


जब आपकी फाइनेंशियल कंडीशन ठीक नहीं होती तो उस सिचुएशन से निकलना आपको काफी मुश्किल का काम नजर आता है । और उस खराब सिचुएशन से निकलने के लिए जिस चीज की जरूरत सबसे ज्यादा है वो है क्लैरिटी ।

क्लैरिटी को हांसिल करने का सबसे आसान तरीका है की आप अपने लिए गोल सेट करें । ऐसे गोल जिसके बारे में सोच कर भी आपको हैप्पीनेस मिलती हो । अपने आप से ये सवाल करना बहुत जरूरी है कि कौन सी चीज आपको खुशी प्रदान करती है।

मान लीजिए की आप अपने किसी दोस्त के यहां गए और वहां आपने कुछ ऐसा फर्नीचर देखा जो आपको काफी पसंद आ गया और उस फर्नीचर की मदद से घर भी आलीशान लगता है । हालांकि अभी आपके पास उतने पैसे नहीं है की आप उसको खरीद सकें लेकिन अपने दोस्त की बराबरी के लिए आप कहीं से उधार लेकर का फर्नीचर को खरीद लेते हैं ।

कुछ दिन बाद आपको एहसास होगा की उस फर्नीचर की खरीद से आने वाली खुशी कहीं गायब हो गयी और उसकी वजह से जो आपने उधार लिया था वो आपको परेशान किए जा रहा है । ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एक समय पर जो चीज आपको लग रही थी की आपको सबसे ज्यादा खुशी देगी वो आपके लिए उतनी अच्छी साबित नहीं हुई ।

इसलिए जरूरी है कि आप राइट गोल सेट करें । बात करें लेखिका की तो उनके लिए हर गोल अलग अलग प्रकार की हैप्पीनेस लेके आता था । उनका एक गोल था की वो अपना खुद का घर खरीद सकें जहाँ उनके बच्चे खुल के एन्जॉय कर सकें और वो अपने दोस्तों को इनवाइट करके उनके साथ क्वालिटी टाइम बिता सकें ।

जब आप अपने लिए एक बड़ा गोल सेट कर लेते हैं तो उसको अचीव करने के लिए आप छोटे छोटे गोल की ओर देखते हैं और उनको पूरा करने के बारे में सोचते हैं । अपना गोल अचीव करने के लिए आप छोटी छोटी चीजों में पैसे बचाने की कोशिश करेंगे ।

अपने फाइनेंस को अच्छे से रिव्यु करें और फिर उसके एकॉर्डिंग बजट बनाएं ।

अगर आप अपने फाइनेंशियल टारगेट को अचीव करना चाहते हैं तो आपको यह क्लियर होना चाहिए की आपके गोल्स क्या हैं और उसको अचीव करने के लिए आप कैसे छोटे छोटे स्टेप्स लेंगे । गोल अचीव करने के लिए जरूरी है की आप अपने फाइनेंस यानी की पैसों का सही यूज़ करें ।

और इसके लिए आपको एक सिस्टमैटिक बजट की जरूरत होगी । सबसे पहले यह पता करिए की आप पैसा खर्च किस जगह पर करते हैं । कोशिश करिए की अपने लास्ट सिक्स मंथ की स्पेंडिंग पर नजर डालिए । ऐसा करने से आपको समझ आएगा की आपने फालतू का खर्च किस फील्ड में किया है । हालांकि इससे आपको बुरा तो लगेगा लेकिन जबतक आपको यह पता नहीं चलेगा की आप गलती कहाँ कर रहे हैं तबतक आप इम्प्रूवमेंट कैसे करेंगे ।

दूसरी चीज ध्यान दें की आपकी इनकम कितनी है और आप खर्च कितना कर रहे हैं । मतलब आपके पास मंथ की शरूआत में कितने पैसे होते हैं । और उसके बाद पता करिए की वो कौन कौन से एरिया हैं जहाँ पर हर मंथ खर्च होता ही है ।

जैसे की घर का रेंट , टैक्स , बच्चों की फीस ये सब चीजें । अगर आपका महीने का खर्च आपकी इनकम से ज्यादा है तो आपको रीथिंक करने की जरूरत है ।

तीसरे स्टेप में अपनी रेगुलर आउटगोइंग को एनालाइज करें । ऐसी चीजें जो जरूरी तो नहीं है लेकिन एंटरटेनमेंट के लिए वैल्युएबल हैं । इसको एनालाइज करें और से दूरी बनाएं जिसके आप रह सकते हैं । हां अगर थोड़ा बहुत एक्स्ट्रा खर्च हो रहा हो तो कोई प्रॉब्लम नहीं है ।

स्टेप फोर में अपने वेरिएबल एक्सपेंस पर नजर डालें । वो खर्चे जो हर महीने में बदलते रहते हैं । हालांकि ये खर्चे जरूरी होते हैं लेकिन इनपर पैसे सेव किए जा सकते हैं ।

लास्ट स्टेप फाइव । देखे की सब तरह की चीजें एनालाइज करने के बाद क्या बचा है । आप अपने बचे हुए पैसों को सेव कर सकते हैं या उस पर खर्च कर सकते हैं जो आपको पसंद हो । हालांकि ये सब करने में थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन ये बहुत जरूरी है ।


बजटिंग खराब नहीं है । इकोनॉमिकल लाइफ के बहुत फायदे हैं ।


फाइनेंशियल प्रेसर के साथ स्ट्रगल करना काफी हार्ड है । लेकिन कभी कभी ऐसी लाइफ जीना भी जरूरी है । हमेशा याद रखिए की लाइफ इज शार्ट । आप अपने खर्चों को याद करके भी एन्जॉय कर सकते हैं ।

इकोनॉमिकल होने से शायद आप उन चीजों को अप्रिसिएट कर पाएं जिनको आप पहले ओवर लुक कर देते थे । सबसे पहले तो आपके दिमाग में ये सोच आना जरूरी है की नई चीजें खरीदने से हैप्पीनेस नहीं आती । कोशिश करिए की आप पुरानी चीजों में खशी ढूंढ पाएं । अगर आपको कपड़े ही खरीदने हैं तो क्यों न सेकंड हैंड शॉप पर जाकर खरीदें ।

पैसे फालतू जगह पर खर्च करने से अच्छा क्यों न आप उन पैसों की मदद से एक पिकनिक प्लान करें या फिर म्यूजियम जाएं । ये सब चीजें एंटरटेनमेंट भी देंगी और यहां पर पैसे भी कम खर्च होंगे । और सबसे जरूरी बात इससे आपको सैटिस्फैक्शन भी मिलेगा ।

इकोनॉमिकल होकर लाइफ जीना काफी इकोफ्रेंडली भी होता है । दो सबसे जरूरी चीज जो आप कर सकते हैं पूरे वर्ल्ड को सेव करने के लिए वो ये हैं कि एयर ट्रेवल न करें और मीट न खाएं । इन दोनों ही चीजों के बिना रहा जा सकता है और इंसान इसपर ही सबसे ज्यादा खर्च करता है ।

सबसे जरूरी चीज कभी भी पैसों की प्रॉब्लम को छुपाएं नहीं । जब आप अपने इकोनॉमिक जीवन को सबके सामने रखते हैं तो लोग आपसे इन्सपायर होते हैं । आखिरी और सबसे जरूरी चीज खुद को मटेरियलिज्म से दूर रखें ।

जरूरी नहीं की आप किसी को महंगा गिफ्ट देकर ही यह साबित करें की आप उसकी केअर करते हैं । आप महंगे गिफ्ट से ज्यादा एक्सपेंसिव चीज भी दे सकते हैं वो है आपका कीमती टाइम ।


Real Life Money Book Summary Conclusion | कुल मिलाकर


ये जरूरी है की आप खुद को अपनी फाइनेंशियल प्रॉब्लम की वजह माने लेकिन यह याद रखें की सारी गलती सिर्फ आपकी ही नहीं है ।

बहुत सारी चीजों की वजह से ये होता है । जब आप अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन को कंट्रोल करने के काबिल हो जाएं तो वही सही समय है जब एक अच्छा गोल आपकी हेल्प कर सकता है । डोंट फॉरगेट टू लिव योर लाइफ ।

क्या करें ।

अपने फाइनेंस को अच्छे से मैनेज करने के लिए एक स्क्वायर पेपर लें और जब भी आप सेविंग करें तो उस पेपर पर एक बॉक्स को कलर कर दें । जब आपको अपनी प्रोग्रेस नजर के सामने दिखती रहेगी तो आपको एहसास रहेगा की आप अपने गोल के कितने करीब हैं ।

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