Nonviolent Communication Full Book Summary In Hindi

Nonviolent Communication Full Book Summary In Hindi

कुछ लाइनों पढ़े के ना ऐसा लगता की आज के टाइम में ना ये एक दम फिट बढ़ती है,

जिसकी ज़िन्दगी की आदि शिकायते युही दूर हो जाये अगर लोग एक दूसरे के बार में बोलने के बजाये एक दूसरे से बोलना सीख जाए.

इन लाइनों को पढ़कर आप भी सोच रहे होंगे की सच में लोग ना बात ही नहीं करते एक दूसरे को टॉट मार रहे है, सुना रहे है, क्रिटिसिज़े कर रहे है, बिना कुछ जाने बस बोले जा रहे है |

 
Nonviolent Communication Full Book Summary In Hindi
Nonviolent Communication Full Book Summary In Hindi

और कभी कभी तो ऐसा लगता है की बातों ही बातो में कहीं लड़ाई ना हो जाये | छोटी बात शुरू होती है और पता नहीं कहा चली जाती है | और ये सब देख कर आप सोचते होंगे की किसको हार्ट किये विना किससे बात की भी जा सकती है या नहीं


क्या इस बेरहम दुनिया में लोगो के लिए एक दूसरे के प्रति दयालुता होना काइंड होना पॉसिबल भी है या नहीं

यहां पर एक बहुत ही अच्छी बात है की अभी हमारे लिए एक दूसरे के प्रति दयालु होना और काइंड होना बाकिये में पॉसिबल है| यनि की प्यार मोहबत से भी बात हो सकती है | लकिने किसे

ये सब जाने हम जानेगे किसे आज की इस किताब में….

Nonviolent Communication Introduction | इंट्रोडक्शन 


आप लोगों को चोट पहुँचाए बिना उनसे कैसे बात कर सकते हैं ? क्या इस बेरहम दुनिया में लोगों के लिए एक दूसरे की ओर दयालु होना पॉसिबल है ? आप अपनी फीलिंग्स और ज़रूरतों को दूसरों को कैसे बताते हैं ? आप खुद से प्यार और अपना ख्याल कैसे रखते हैं ? ध्यान दें कि ये सवाल कैसे दूसरों के साथ आपको इवॉल्व करते हैं । इस दुनिया में , क्रिटिसिज़म और मार धाड़ आम हो गई है ।

अभी भी हमारे लिए एक दूसरे की ओर दयालु और काइंड होना पॉसिबल है । यह बुक आपको नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) और इसे अपने जीवन के अलग अलग पहलू पर कैसे अप्लाई करना है ये सिखाएगी , ताकि आप दूसरों पर दया कर सकें ।

 
इस बुक के जरीये , आप दूसरों को बिना सख्ती से जज किए देखना शुरू कर देंगे और जैसे वो हैं वैसे ही उन्हें एक्सेप्ट कर लेंगे । आप उन्हें सुनना शुरू करेंगे और उनकी असली फीलिंग्स और ज़रूरतों को समझेंगे । 
आप दूसरों में अच्छाइयाँ देखने लगेंगे और उनकी तारीफ़ करेंगे । नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन Nonviolent Communication Book ) की प्रैक्टिस करना आपकी ज़िन्दगी बदल देगा । दया से हम दुनिया को बदल सकते हैं । 
 

Giving from the heart | गिविंग फ्रॉम द हार्ट 

 
आजकल यह दुनिया रहने के लिए एक अच्छी जगह नहीं रह गई है । लोगों का व्यवहार खराब होता जा रहा है , लोग एक दूसरे को जज करते हैं , और एक दूसरे की सोच और फीलिंग्स को नज़रंदाज़ करते हैं । क्या आपको लगता है कि इस निर्दयी दुनिया को बदलने का कोई रास्ता है ? 
 
फॉर्च्नेटली , दूसरों की ओर दयालु बनने की शुरुआत करने का एक रास्ता है । इस रास्ते को नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) कहा जाता है । 
 
नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) कम्युनिकेशन का एक तरीका है जो हमें उस समय में भी इंसान बने रहने के लायक बनाता है , जब हम चैलेंजिंग सिचुएशन का सामना कर रहें हों ।
 
यह लोगों को दूसरों के नज़रिए को सुनने और खुद को साफ़ – साफ़ और इमानदारी से एक्सप्रेस करने में मदद करता है । दुनिया भर में कई लोग अपने करीबी रिश्तों को गहरा करने के लिए , काम पर इफेक्टिव रिश्ते बनाने के लिए या पॉलिटिकल फील्ड में नेगोशिएट करने के लिए नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) को यूज़ कर चुके है । 
 
नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन  बुक  ( Nonviolent Communication Book ) के सफल होने के लिए , इसके 4 कॉम्पोनेंट्स , 
1. ऑब्जरवेशन, 
2. फिलिंग्स, 
3. नीड्स 
4. रिक्वेस्ट्स
 
की ज़रूरत है । पेरेंट्स अपने बच्चों को उनकी गलतियों के लिए , घर पर , स्कूल में या और किसी जगह , डांट सकते हैं । बच्चे भी उनकी गलती बताए जाने पर , पलट कर कुछ बोल सकते हैं । 
अक्सर , पेरेंट्स और बच्चे बहस करते हुए कहे गए शब्दों का इंपैक्ट नोटिस नहीं करते हैं । जैसे कि एक माँ ने 2 गंदे मोज़े कॉफी टेबल के नीचे और 3 गंदे मोज़े TV के बगल में देखे । 
 
उन्होंने इस बारे में अपने बेटे फेलिक्स से , नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन Nonviolent Communication Book ) के चारों कॉम्पोनेंट्स , ऑब्जरवेशन , फिलिंग , नीड्स और रिक्वेस्ट , को यूज़ कर के बात की । 
 
माँ ने फेलिक्स को मोज़े कहाँ है ये बता कर अपने ऑब्जरवेशन को पॉइंट आउट किया । उन्होंने बताया कि वह गुस्से में है और समझाया कि उन्हें रूम में , जिसे सब शेयर करते हैं , साफ़ सुथरा चाहिए । 
 
आखिर में , माँ ने अपनी बात , फेलिक्स को यह रिक्वेस्ट कर के खत्म की कि , उसे अपने मोज़े अपने रूम में या वाशिंग मशीन में रखने चाहिए । अपने बेटे पर चिल्लाने के बजाय , माँ ने हमें दिखाया कि नॉन वायलेंट कम्युनिकेशन Nonviolent Communication Book ) किसी के विचारों को एक्सप्रेस करने और आपसी समझौते को अचीव करने में कितना इफेक्टिव हो सकता है ।
 
Nonviolent Communication Book Pdf  Download 

Communication that blocks compression | कम्युनिकेशन डैट ब्लॉक्स कंपैशन

लोग नैचुरली लेन देन करने के लिए बने हैं । शुरू से ही दया हमारे अंदर रही है । हालांकि , कम्युनिकेशन के कुछ तरीकों ने लोगों को उनके अंदर नेचुरल दया और सहानुभूति से दूर कर दिया है । आपको कैसे पता चलेगा कि कोई काम सही है या गलत ।
लोग जिन चीजों को सबसे ज्यादा वेल्यू देते हैं , वो उसके आधार पर दूसरों को जज करते हैं । जैसे कि , आप समय को बहुत ज़्यादा वेल्यू देते हैं , और आप अपने ऑफिस के साथी को ज्यादातर समय ऑफिस में देर से आते देखते हैं ।
आप अपने साथी की समय की ओर लापरवाही को नापसंद करना शुरू करते हैं और उसे आलसी और सुस्त इंसान के रूप में देखने लगते हैं । तुलना करना भी एक तरह से जजमेंट होता है । आप अपनी ख़ामियों के बारे में जानकर दुखी महसूस करते हैं ।
जैसे , हम कैसे अक्सर खुद को सेलिब्रिटीस या उन लोगों से compare करते हैं जिनके पास ऐसे फिजिकल फीचर्स होते हैं जिसे हम पाना चाहते हैं ।
ऐसा करने से हमारे अन्दर जलन और बुरी भावनाएं आती हैं जो हमें दूसरों को चोट पहुंचाने के लिए उकसा सकती हैं । जब हम अपनी इच्छाओं को डिमांड की तरह कम्युनिकेट करते हैं तब हम कम दयालु बन जाते हैं । यह उन लोगों पर लागू होता है जिनके पास दूसरों के ऊपर कुछ हद तक अथॉरिटी होती है । ज्यादातर लोग ये नहीं समझ पाते कि हम कभी भी दूसरों से कुछ नहीं करा सकते हैं ।
आपके ज़िन्दगी में एक समय ऐसा ज़रूर होगा जब आपने कुछ ऐसा किया जो आप नहीं चाहते थे , लेकिन आपको करना पड़ा । एक टीचर ने इसी एक्सपीरियंस को शेयर किया , जब उन्हें अपनी जॉब के हिस्से के रूप में ग्रेड्स देने की शिकायत की ।
उनकी राय में , ग्रेड देना सिर्फ समय और एफर्ट को वेस्ट करना है , क्योंकि इससे स्टूडेंट्स मे चिंता पैदा करते हैं । उनकी राय के बावजूद , टीचर ने कहा कि उन्हें ग्रेड देना ही पड़ा क्योंकि यह डिस्ट्रिक्ट पॉलिसी है ।
डिस्ट्रिक्ट पॉलिसी को दोष देने के बदले टीचर ने यह महसूस किया कि उन्होंने ग्रेड देना चुना क्योंकि उन्हें अपनी जॉब पसंद है ।
यह कहने के बजाय कि उन्होंने सिर्फ इसलिए ग्रेड्स दिए क्योंकि उन्हें ग्रेड्स देने थे , वो अपनी पर्सनल रिस्पॉन्सिबिलिटी का भार फील करने लगीं । रिस्पॉन्सिबिलिटी से मुकरना एक तरह से कम्युनिकेशन को दूर करने जैसा है । यह लोगों को उनके द्वारा की गई चीजों की पर्सनल रिस्पॉन्सिबिलिटी की भावना को खोकर , हर चीज के लिए बहाने ढूंढने का कारण बनता है ।
आपको एक पर्सनल कारण ढूंढना चाहिए कि आपने जो किया वो क्यों किया और उसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए ।

Observing without educating | ऑब्जर्विंग विदाउट एजुकेटिंग 

क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने दूसरों के एक्शन पर कमेंट किया हो ? जिंदगी में कभी ना कभी आपने किसी को अजीब , बेवकूफ या गुस्सा दिलाने वाला कहकर डिस्क्राइब किया होगा । बहुत से लोग अपने ऑब्जर्वेशन के साथ अपनी जजमेंट को मिलाने की गलती करते हैं ।
जैसे हम किसी को ऐसे शब्दों का लेबल दे देते हैं , ये बताता है कि कैसे हमने दूसरों के लिए अपनी दया को खो दिया है । नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) को ठीक से प्रैक्टिस करने के लिए और अपने दया को वापस पाने के लिए , हम दूसरों से जो सुनते और देखते हैं , उसे बिना जज किए , साफ़ साफ़ समझना पड़ेगा ।
उस ऑब्जरवेशन को याद करना नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) का पहला कॉम्पोनेंट है । अगर आप अपने ऑब्जरवेशन के साथ जजमेंट को मिला देते हैं , तो ये हो सकता है कि वह इंसान आपके असली मैसेज को याद ना रख कर , सिर्फ आपके क्रिटिसिज्म को याद रखे ।
लेकिन , इसका यह मतलब नहीं कि हमारे पास जज करने का हक नहीं है । नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) भेदभाव को रोकने की कोशिश कर रहा है । इसलिए , इवैल्यूएशन सिर्फ तभी किया जाना चाहिए जब यह किसी ख़ास समय या कॉन्टेक्स्ट में स्पेसिफिक ऑब्जरवेशन पर बेस्ड हो । एक एलिमेंट्री स्कूल में टीचर्स और प्रिंसिपल के बीच में ग़लतफ़हमी का केस हो गया ।
जब टीचर्स से पूछा गया कि वह प्रिंसिपल के बारे में क्या सोचते हैं , तो उनमें से कुछ ने कहा , ” प्रिंसिपल की ज़बान बहुत लंबी है ! ” ” प्रिंसिपल बहुत ज्यादा बोलते हैं ! ” ” वो हर समय सेंट्रर ऑफ अटेंशन बने रहना चाहते हैं ! ” आपको क्या लगता है कि ये बातें ऑब्जरवेशन हैं या इवैल्यूएशन ?
टीचर्स ने ये बताया कि प्रिंसिपल हमेशा अपने बचपन की या अपने जंग के समय के एक्सपीरियंस की स्टोरी शेयर करते रहते हैं जिससे उनकी स्टाफ मीटिंग 20 मिनट ज्यादा लम्बी हो जाती है ।
टीचर्स ने प्रिंसिपल के सामने कभी भी इस व्यवहार के बारे में नहीं बताया । उन्होंने फ़ैसला किया कि अगली मीटिंग में वो ज़रूर इस बात को बोलेंगे । जब समय आया , प्रिंसिपल फिर से अपनी एक और स्टोरी शेयर करने में लगे ।
टीचर्स ने फिर से कुछ नहीं कहा । इसके बदले , उन्होंने ऐसा बिहेव किया जिससे बिना कुछ कहे ही यह दिख गया कि वो प्रिंसिपल की बुराई करते हैं , जैसे आँखें घूमाना और अपनी घड़ी चेक करना ।
जब टीचर्स को कुछ कहने के लिए कहा गया , तो उनमें से एक ने प्रिंसिपल से कहा कि वो बातूनी हैं और अपनी पर्सनल बातें सबको बताते हैं । इससे , आप सीखेंगे कि अपने ऑब्जरवेशन से अपनी जजमेंट को अलग करना कितना मुश्किल है ।
किसी को जज करने में , आपको उन बातों को बताना चाहिए जहाँ उस इंसान ने ऐसा व्यवहार दिखाया था । इस तरह , वह इंसान ज्यादा अच्छे से समझ पाएगा । ये उस इंसान को न बताने और उसकी पीठ के पीछे उससे नफरत करने से बेहतर होता है ।

Identifying and Expressing Feelings | आईडेंटिफाइंग एंड एक्सप्रेसींग फीलिंग्स 

नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) को प्रैक्टिस करने का दूसरा कॉम्पोनेंट है , अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करना । हालांकि , सभी लोग अपनी फीलिंग्स को ठीक से एक्सप्रेस नहीं कर सकते हैं या दूसरों के साथ कम्युनिकेट करते समय वल्नरबल हो सकते हैं ।
क्या आप एक कारण बता सकते हैं कि क्यों आप अपनी फीलिंग्स के बारे में किसी और से खुलकर बात नहीं कर पाते ?
यह सोसाइटी में हमारे एक्सपेक्टेड रोल्स के कारण या वह माहौल जहाँ कम्युनिकेशन हो रहा है या यह चिंता कि हम दूसरों की भावनाओं को चोट पहुँचा सकते हैं , के कारण हो सकता है . और , हम अक्सर अपनी थॉट्स और अपनी फीलिंग के बीच कंफ्यूज हो जाते हैं ।
अंग्रेजी भाषा में , ” feel ” शब्द को ” think ” शब्द के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है । अपनी फीलिंग को एक्सप्रेस करते हुए , आपको डाउट से बचना चाहिए ।
एक हॉस्पिटल के एडमिनिस्ट्रेटर्स को नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) यूज़ करके एक वोटिंग के मुद्दे को सुलझाना सिखाया गया । डॉक्टर्स ने हाल ही में 17 से 1 के वोट कर एडमिनिस्ट्रेटर्स के बताए हुए प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया । पहले , एडमिनिस्ट्रेटर्स ने सोचा कि इस मामले पर अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करना अच्छा नहीं होगा क्योंकि सारे डॉक्टर उन्हें बुरी तरह से हरा सकते हैं । उन्होंने यह भी सोचा कि काम की जगह में अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करना सही नहीं है ।
हालकि जब एडमिनिस्ट्रेटर्स ने अगली मीटिंग में नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) यूज़ किया , तो वो अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करते हुए और यह बताते हुए कि उनके प्रपोज़ल के बारे में दोबारा सोचा क्यों जाना चाहिए , वो डॉक्टरों से अपील कर पाए । एडमिनिस्ट्रेटर्स ने अपने सख्त लॉजिकल और अनइमोशनल व्यवहार को छोड़ दिया ।
जब मीटिंग ख़त्म हुई तब डॉक्टरों के अपनी राय बदलकर दिए गए प्रपोज़ल को सपोर्ट किया । अगर हम नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) को ठीक से प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो हमें क्या समझना चाहिए कि हमारी वल्नरबलिटी एक्सप्रेस करने से झगड़ों को सुलझाने में मदद मिल सकती है ।
जब हम अपनी फीलिंग्स को दूसरों के सामने एक्सप्रेस करते हैं , तो हमें ये पूरी इमानदारी से करना चाहिए । अगर कोई हमारे सामने इसे एक्सप्रेस कर रहा है तो हमें तुरंत जज करने के बजाय दूसरों को समझना चाहिए और उनके साथ सहानुभूति रखनी चाहिए ।.

Take responsibility of our peeling | टेक रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ़ आवर पीलिंग 

आप आपके के लिए बोले गए नेगेटिव मैसेज को कैसे एक्सेप्ट करते हैं ? यह कहा जाता है कि लोग 4 तरीके से नेगेटिव मैसेज रिसीव करते हैं ।

पहला ,

आप खुद को दोष दे सकते हैं । आप किसी और इंसान के जजमेंट को सही मान कर अपने सेल्फ एस्टीम को अफैक्ट कर सकते है ।

दूसरा ऑप्शन है ,

स्पीकर को दोष देना । जब आप दूसरों से अपने लिए बुराइयां सुनते हैं तो आपको गुस्सा आता है और आप खुद का बचाव करने की कोशिश करते हैं ।

तीसरा ऑप्शन है

अपनी खुद की फीलिंग्स और ज़रूरतों के बारे में सोचना । यहाँ आप अपना अटेंशन अपनी करंट फीलिंग्स और ज़रुरत पर फोकस करते हैं और स्पीकर को एक्सप्रेस करते हैं । आखिर में , आप स्पीकर से उसकी करंट फीलिंग्स और ज़रूरतों के बारे में पूछ सकते हैं ताकि आप उन्हें बेहतर तरीके से समझ सकें । आपको क्या लगता है कि नेगेटिव मैसेज को एक्सेप्ट करने में कौन सा ऑप्शन सबसे अच्छा है ?
नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) को इफेक्टिव ढंग से प्रेक्टिस करने के लिए , आपको अपनी फीलिंग्स को अपनी ज़रूरतों से कनेक्ट करके शुरू करना चाहिए ।
आपको इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए । क्योंकि अगर आप अपनी फीलिंग्स और ज़रूरतों को एक साथ एक्सप्रेस करते हैं , तो आपकी ज़रूरतें के पूरे होने का ज़्यादा चांस होता है ।

किसी की फीलिंग्स और ज़रूरतों को पहचानने के लिए 3 स्टेज का प्रोसेस दिखाया गया है ।

पहले स्टेज को ” इमोशनल स्लेवरी ” कहा जाता है , जिसमें आप दूसरों के इमोशंस की ज़िम्मेदारी लेना शुरू कर देते हैं और जो भी करते हैं , हमेशा उनके बारे में सोचकर करते हैं । क्या आप कभी रोमेंटिक रिलेशनशिप में रहे हैं ? आपने देखा होगा कि पहले कुछ महीनों में रिलेशनशिप बहुत खूबसूरत होता है ।
लेकिन जब चीजें सीरियस हो जाती हैं , तो कपल एक – दूसरे की फीलिंग्स की ज़िम्मेदारी लेना शुरू कर सकते हैं । अगर उनमें से एक बहुत भार महसूस करने लगता है और अपने साथी की फीलिंग्स की ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहता है , तो वो अंत में अलग हो जाते हैं ।
दूसरे स्टेज को ” obnoxious ” , कहा जाता है यानी कि बहुत बुरा जिसमें आप गुस्सा महसूस करते हैं और अब दूसरों की फीलिंग्स के लिए ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं । जैसे कि , एक यंग लड़की dungaree पहनकर स्कूल गई , और स्कूल के अथॉरिटीज़ ने उसे बुलाया ।
लड़की ने अपने गुस्से और आज़ादी को एक्सप्रेस करते हुए , जवाब दिया “ भाड़ में जाओ ! ” हालांकि , यह स्टेज सेलफिश होने के बारे में नहीं है । यहाँ , आप इस बात को जानेंगे कि इमोशनल आज़ादी आपकी ज़रूरतों को इस तरह से स्वीकार कर रही है जो दूसरों की ज़रूरतों का सम्मान करती है ।
इसलिए , उस लड़की को अभी ये सीखने की ज़रूरत है कि जब वह अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करती है तो दूसरों का सम्मान कैसे करे ।
आखिरी स्टेज ” इमोशनल लिबरेशन ” है जिसमें हम दया के साथ दूसरों को जवाब देते हैं और कभी भी डरकर , या शर्म महसूस कर ऐसा नहीं करते । यहाँ आप खुद की फीलिंग्स और एक्शन्स की ज़िम्मेदारी एक्सेप्ट करते हैं ।

Requesting that witch wood life | रिक्वैस्टिंग डैट विच वूड एंरीच लाइफ 

आपका किसी और से रिक्वैस्ट करना नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) का चौथा ज़रूरी कॉम्पोनेंट है । रिक्वैस्ट करते हुए , हमें इसे स्पेसिफिक बनाना चाहिए और पॉज़िटीव एक्शन लैंग्वेज यूज़ करना चाहिए । जैसे कि , अगर आपको अभी अपनी तीन इच्छाएं एक जिन्न को बतानी हो , तो आप इसे कैसे कहेंगे ? याद रखें कि हम जो चाहते हैं , उसके लिए हम जितना क्लियर होंगे , उतना ही ज्यादा चांस है कि वो हमें मिल जाएगा
अक्सर , हमारे रिक्वैस्ट दूसरों को डिमांड की तरह लग सकते हैं । आपके लिए ये मददगार साबित होगा कि आप अपने लिसनर को आपका मेसेज रिपीट करने के लिए कहें ताकि आप यह जान पाएँ कि आपने जो कहा क्या उसने उसका सही मतलब समझा या नहीं ।
एक सिंपल ” क्या जो मैंने कहा आप वो रिपीट सकते हैं ? ” या ” क्या यह क्लियर है ? ” आपको आपके रिक्वैस्ट को ठीक से कम्युनिकेट करने में मदद कर सकता है ।
ऐसे समय भी होते हैं जब हमारे रिक्वैस्ट पूरे नहीं होते हैं या हमें दिए नहीं जाते हैं । आपको यह याद रखना चाहिए , कि आप कभी भी किसी को जो आप चाहते हैं , वो करने के लिए फोर्स नहीं कर सकते ।
दूसरों के प्रति बुरी फीलिंग्स रखने के बजाय , उनसे उनके कारण पूछे और उनसे सहानुभूति रखें ।आखिरकार , नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) एक दूसरे के लिए दयालु होने के बारे में है ।
दो केस पर विचार करें । दोनों में जैक और जेन नाम के दो दोस्त हैं ।
पहले केस में , जैक अकेला फील कर रहा है , और वह जेन को उसके साथ रात बिताने के लिए इंवाइट करता है । जेन झिझकती है , क्योंकि वो थकी हुई है । वो जैक को सुझाव देती है कि रात को समय बिताने के लिए वो किसी और बुला ले । फिर जैक उस पर चिल्लाता है : “ तुम कितनी सेलफिश हो ! “
दूसरे केस मे अभी भी जैक अकेला फील कर रहा है , और वह जेन को उसके साथ रात बिताने के लिए इंवाइट करता है । उसी वजह से , जेन झिझकती है और सुझाव देती है कि जैक किसी और को बुला ले । यह सुनकर , जैक बिना कुछ कहे , जाने लगता है ।
जेन को बुरा फील होता है और वो पूछती है , ” क्या तुम्हें कुछ परेशान कर रहा है ? ” जैक ना कह देता है , लेकिन जेन उसे बताने के लिए ज़ोर देती है । जैक ने जवाब दिया , “ तुम जानती हो कि मैं कितना अकेला फील कर रहा हूं । अगर तुम सच में मुझसे प्यार करती हो , तो मेरे साथ समय बिताओ । ” अब , खुद से पूछिए । इन दोनो केस में क्या गलत है ?
पहला केस हमें दिखाता है कि कैसे जैक ने पहले ही जेन के कैरेक्टर को लेकर जजमेंट बना लिया था । जेन की आराम करने की ज़रुरत को समझने के बजाय , जैक ने दोष ब्लेम किया , भले ही वो उसके रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए मजबूर नहीं थी ।
दूसरा केस हमें बताता है कि जैक जेन को गिल्टी फील करा कर , “ अगर मगर ” वाली सिचुएशन दे रहा था । हम जितना ज्यादा इनकार को रिजेक्शन के रूप में देखेंग , उतना ही ज़्यादा हमारे रिक्वैस्ट को डिमांड के रूप में देखा जाएगा ।
हमें दूसरों से हमारे रिक्वैस्ट को मना कर देने का कारण पूछना चाहिए और उन्हें अच्छे से समझने की कोशिश करनी चाहिए । इससे शायद अगली बार साथ बिताने के लिए बेहतर समय हो सकता है ।

Receiving amputally | रिसीविंग एम्पथीकली 

सहानुभूति या हमदर्दी का आपके लिए क्या मतलब है ? आप लोगों के साथ कैसे सहानुभूति रखते हैं ? सहानुभूति तब होती है जब आप अपना दिमाग खाली कर के , पूरे दिल से दूसरे इंसान को सुनते हैं ।
ये जो दूसरे एक्सपीरियंस कर रहे हैं या आपसे शेयर कर रहे हैं उसको रिस्पेक्ट करना होता है । यह दूसरे सभी मामलों को अलग कर के , उस इंसान के लिए फिज़िकली और मेन्टल रूप से मौजूद होने की ओर इशारा करता है ।
नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) में , हमें दूसरे लोगों के ऑब्जरवेशन , फिलिंग्स , ज़रूरतों और रिक्वेस्ट को सुनना चाहिए । आपने उनके मैसेज से जो समझा है , उसे शोर्ट में बताइए । इससे पहले कि आप उनकी ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश करें , आपको उन्हें खुद को पूरी तरह से एक्सप्रेस करने देना चाहिए ।
NVC दो तरफा काम करता है । दूसरों को हम दर्दी देने के लिए , हमें भी हमदर्दी को एक्सपीरियंस करना चाहिए । हालांकि , जब आपको लगता है कि आप दूसरों से हमदर्दी करने की कंडीशन में नहीं हैं , तो आपको रुक कर सांस लेना चाहिए , और खुद को सहानुभूति देनी चाहिए जो आप डीज़र्व करते हैं ।
अस्पताल में एक औरत जो volunteer थी , ने एक बुजुर्ग पेशेंट पर नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) प्रेक्टिस करने की कोशिश की ।
उसके पहले , उस बूढ़ी औरत की देखभाल के लिए जिन नर्सों को ज़िम्मेदारी दी गई थी उन सबको उन्हें खाना और उनकी दवा खिलाने में बहुत परेशानी होती थी । बूढ़ी औरत दिन भर अपने कमरे में बैठी रहती , और “ मैं मरना चाहती हूं ” बड़बड़ाती रहतीं ।
वो औरत बूढ़ी औरत के पास गई । उसके वहाँ होने के बावजूद वो बुजुर्ग औरत ” मैं मरना चाहती हूं ” बोलती रहीं । फिर उस औरत ने बड़ी प्यार से कहा , ” तो आप मरना चाहती हैं । इस बात से हैरान हो कर कि किसी ने आखिरकार उनकी बात सुनी और उनकी बातों पर ध्यान दिया , बूढी औरत रुकी और उस औरत पर ध्यान देने लगी ।
बूढ़ी औरत बताने लगी कि कैसे कोई उनकी फीलिंग्स को नहीं समझता । उस औरत ने भी बूढी औरत को बड़े प्यार से जवाब दिया , जिससे उन्हें बातचीत मे अपनापन लगे । फिर , उन्होंने एक – दूसरे को गले लगाया और बूढ़ी औरत ने खाना और दवा खाना शुरू कर दिया । बूढी मरीज पर नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) का इंपैक्ट देखकर , सभी नर्स आश्चर्यचकित हो गईं ।
अगर नर्सों NVC ठीक से प्रैक्टिस किया होता , तो वे बूढी औरत की सिचुएशन को बेहतर समझ पातीं । नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC) सहानुभूति के बारे में है । यह एक दूसरे की फीलिंग्स को समझने और एक दूसरे के लिए मौजूद रहने के बारे में है ।

The power of empathy | द पावर ऑफ एम्पथी 

अब जब आपको सहानुभूति के बारे में बता दिया गया है , तो अब आपको खुद भी यह सोचना शुरु करना चाहिए , कि आप सहानुभूति को फ़ायदेमंद तरीके से कैसे यूज कर सकते हैं । सहानुभूति का इंपैक्ट क्या है ?
सहानुभूति हमें दुनिया को कई अलग अलग नज़रिए से देखने में मदद करती है । हालांकि , ऐसे समय भी आएंगे जब आप के लिए दूसरों से हमदर्दी जताना मुश्किल होगा , खासकर जब ऐसा लगे कि उनके पास ज्यादा पावर , स्टेटस या रीसोर्स है ।
गौर कीजिए कि किस तरह आपके लिए अपने फ्रेंड से हमदर्दी जताना आसान है , लेकिन अपने बॉस या प्रोसेसर से बात करते हुए यह थोड़ा अजीब लगता है ।
हालांकि , वल्नरबल होने पर हम बंधा हुआ फील करने के बजाय ज़्यादा सेफ़ फील कर सकते हैं । वल्नरबल होने से हिंसा की संभावना कमज़ोर हो जाती है क्योंकि हम अपनी फीलिंग्स और थॉट्स को एक्सप्रेस करने के लिए कंफरटेबल फील करते हैं ।
सहानुभूति आपके रोज़ की बातचीत में जान डाल सकती है । पहले आप सोचते होंगे कि किसी की बात को बीच मे काटना बदतमीजी है । लेकिन , अगर आप एक स्पीकर को सहानुभूति के साथ टोकते हैं , तो बातचीत अपनी सही दिशा में जाएगी । कभी – कभी , सहानुभूति बिना कुछ कहे भी सुनी जा सकती है ।
ऑब्जर्वर करें कि जब किसी इंसान की बोलते हुए आंखें भर आती हैं , तो लोग कैसे रिएक्ट करते हैं । आपको किसी के साथ हमदर्दी जताने के लिए बहुत सारे शब्दों या सवालों की ज़रूरत नहीं है । सहानुभूति एक इंसान के लिए पूरी तरह से मौजूद रहने की हमारी एबिलिटी पर डिपेंड करती है ।
साइकेट्रिक केयर में रह रही एक 20 साल की औरत तीन महीने से बिलकुल चुप हो गई थी । जब वो डॉक्टर रोसेनबर्ग के ऑफिस में आई , तो उसने एक शब्द भी नहीं बोला , तब भी , जब डॉक्टर उससे बात कर रहे थे । अगले कछ दिनों की काउंसलिंग वैसी ही रही ।
तब , डॉक्टर रोसेनबर्ग ने सोचा कि फिजिकल कांटेक्ट उन्हें औरत से कनेक्ट करने में मदद कर सकता है , इसलिए उन्होंने उनसे हाथ पकड़ कर बात की । कुछ ही समय मे , डॉक्टर रोसेनबर्ग ने देखा कि कैसे वो औरत भले ही कुछ बोल ना रही हो लेकिन वो धीरे से रिलैक्स होने लगी थी । उनके मसल्स में टेंशन कम होने लगा था और उनकी ब्रीदिंग नॉर्मल हो गई थी ।
अगले दिन , जब औरत ऑफिस में आईं , तो उन्होंने डॉक्टर रोसेनबर्ग की ओर एक बंद मुट्ठी बढ़ा दी । तब डॉक्टर ने औरत की कनेक्ट करने की इंटेंशन को समझ लिया और उसने उसकी मुट्ठी को अपने हाथ में ले लिया । औरत ने एक मुड़ा हुआ नोट पकड़ा हुआ था जिसमें लिखा था , “ मुझे मेरे थॉट्स और फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने में मदद कीजिए । “
जैसे जैसे समय बीतता गया , वो औरत फिर से बात करने लगी , खासकर क्योंकि उन्हें लगा कि डॉक्टर रोसेनबर्ग उसकी परवाह करते हैं और उनसे हमदर्दी रखते हैं ।
इससे पता चलता है कि लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने मे और हर किसी के लिए एक सेफ माहौल बनाने में मदद करने के लिए सहानुभूति कितनी इंपॉर्टेट है । साइकोलॉजिकल तकलीफ़ से जूझ रहे लोग ज्यादा अच्छा फील करते हैं , जब कोई ऐसा उनके साथ हो जो उन्हें सहानुभूति दे सके ।

Nonviolent Communication Conclusion

आपने नॉनवायलेंट कम्युनिकेशन ( NVC ) के इंपॉर्टेट्स के बारे में सीखा । आपने सीखा कि सहानुभूति और हमदर्दी , कैसे दूसरों के साथ हमारे रिलेशनशिप को अच्छा बना सकती है , फिर चाहे वो हमारे अपने हों या अजनबी । 
 
हमें दूसरों का जज करना , उन्हें लेबल देना और नाम देना बंद कर देना चाहिए क्योंकि इससे नफ़रत और दूसरे नेगेटिव रिजल्ट पैदा होते हैं । 
 
इसके बजाय , हमें अपनी फीलिंग्स और ज़रूरतों को एक्सप्रेस करना शुरू करना चाहिए । हमें दूसरों से इमानदारी और सहानुभूति से रिक्वेस्ट करना शुरू करना चाहिए । इसके ज़रिए हम एक – दूसरे से कनेक्ट हो सकते हैं और अपने दयालु स्वभाव से वापस जुड़ सकते हैं । 
 
आपको पहले खुद में बदलाव को लाना चाहिए ताकि आप दूसरों को दिखा सकें कि दयालु और हमदर्द होना क्या होता है ।
 
खुद को माफ़ कीजिये । अभी प्रेजेंट मे फोकस करने का , अपनी फीलिंग्स और ज़रूरतों को समझने और पूरा करने की कोशिश करने का और खुद की कदर और तारीफ़ करने का समय है । सख्त जजमेंट को किसी रिश्ते को तोड़ने ना दें । 
 
काइंडनेश फैलाना शुरू करें और लोगों की ओर हमदर्दी बनाए रखें , चाहे वे कोई भी हो । दूसरों को एक्सेप्ट करें और उनके योगदान को खुशी के सेलिब्रेट करें ।

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